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क्या मुंबई सिर्फ सपनों की नगरी है? श्रेया पिलगांवकर ने साझा की अपनी सोच

अभिनेत्री श्रेया पिलगांवकर ने हाल ही में मुंबई में आयोजित यूनेस्को क्रिएटिव सिटी फिल्म इवेंट में अपने विचार साझा किए। उन्होंने मुंबई को केवल सपनों की नगरी नहीं, बल्कि उन सपनों को पूरा करने की शक्ति देने वाला शहर बताया। श्रेया ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और कलाकारों को मिल रहे नए अवसरों पर भी चर्चा की। जानें उनके परिवार, करियर और भविष्य की योजनाओं के बारे में।
 
क्या मुंबई सिर्फ सपनों की नगरी है? श्रेया पिलगांवकर ने साझा की अपनी सोच

यूनेस्को फिल्म इवेंट में श्रेया पिलगांवकर का बयान




मुंबई, 24 मई। हाल ही में मुंबई के नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) में आयोजित यूनेस्को क्रिएटिव सिटी फिल्म इवेंट में अभिनेत्री श्रेया पिलगांवकर ने फिल्म इंडस्ट्री, मुंबई और अपने करियर के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा के विकास, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के प्रभाव और कलाकारों को मिल रहे नए अवसरों पर चर्चा की। श्रेया ने बताया कि उनके लिए मुंबई केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक भावना है, जिसने लाखों लोगों को सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस दिया है।


आईएएनएस के साथ बातचीत में श्रेया ने कहा, 'मुंबई मेरी जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों है। एनजीएमए जैसे प्रतिष्ठित मंच पर मुंबई को यूनेस्को सिटी ऑफ फिल्म के रूप में मनाना मेरे लिए गर्व की बात है। लोग इसे सपनों की नगरी कहते हैं, लेकिन यह शहर केवल सपने दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें पूरा करने की शक्ति भी प्रदान करता है। इसने अनगिनत कलाकारों को अपनी पहचान बनाने का अवसर दिया है।'


उन्होंने अपने पिता का उल्लेख करते हुए कहा, 'मेरे पिता पिछले 60 वर्षों से सिनेमा से जुड़े हुए हैं और उन्होंने मराठी फिल्म इंडस्ट्री में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मैं अपने माता-पिता से निरंतर प्रेरणा लेती हूं। लोग अक्सर मानते हैं कि कलाकारों का करियर कुछ वर्षों तक ही चलता है, लेकिन मेरे माता-पिता आज भी पूरी ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं। यही कारण है कि मैं भी जीवनभर अभिनय और कला से जुड़ी रहना चाहती हूं।'


श्रेया ने यह भी कहा, 'फिल्में देखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि थिएटर और स्टेज आर्टिस्ट्स का समर्थन करना भी आवश्यक है। ओटीटी और वेब सीरीज के आगमन से कलाकारों के लिए नए रास्ते खुल गए हैं। पहले जहां सीमित अवसर थे, वहीं अब विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के कारण उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक मौके मिल रहे हैं। मैंने भी पिछले कुछ वर्षों में ओटीटी पर ध्यान केंद्रित किया है और वहां दर्शकों से मुझे बहुत प्यार मिला है।'


अपने फिल्मी बैकग्राउंड के बारे में श्रेया ने कहा, 'मैं फिल्मी बैकग्राउंड जैसे शब्द का उपयोग नहीं करना चाहती, क्योंकि मैं कहानियों के बीच पली-बढ़ी हूं। मेरे घर में हमेशा सिनेमा का माहौल रहा है, जिससे मुझे कहानियों और अभिनय से गहरा लगाव हो गया। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मेरा जन्म ऐसे परिवार में हुआ जहां कला और सिनेमा पहले से मौजूद थे।'


सोशल मीडिया और दर्शकों की सोच पर भी श्रेया ने अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'आजकल सोशल मीडिया पर नकारात्मक चीजों की अधिक चर्चा होती है, जबकि लोगों को उन कलाकारों और कहानियों के बारे में भी बात करनी चाहिए जिन्हें वे पसंद करते हैं। यदि दर्शक अच्छी कहानियों और कंटेंट का समर्थन करेंगे, तभी और बेहतर फिल्में और सीरीज बनेंगी।'


काम के मोर्चे पर, श्रेया पिलगांवकर आने वाले महीनों में दो बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आएंगी। उन्होंने बताया कि चर्चित वेब सीरीज 'मिर्जापुर' पर आधारित फिल्म अब थिएटर में रिलीज होने वाली है, जिसे लेकर वह बहुत उत्साहित हैं। इसके अलावा, वह निर्देशक प्रियदर्शन की फिल्म 'हैवान' में भी दिखाई देंगी। श्रेया ने कहा कि आने वाला समय उनके लिए खास होने वाला है और वह नए प्रोजेक्ट्स को लेकर बहुत उत्साहित हैं।


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