क्या त्रिधा चौधरी का सपना सच होगा? रणवीर सिंह के साथ 'शिवा ट्रिलॉजी' में काम करने की चाहत!
त्रिधा चौधरी की महत्वाकांक्षा
मुंबई, 24 मई। फिल्म उद्योग में कई कलाकार अब केवल ग्लैमरस भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना चाहते हैं, जिनमें अभिनय के साथ-साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव भी हो।
इस संदर्भ में, अभिनेत्री त्रिधा चौधरी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में अभिनेता रणवीर सिंह के साथ काम करने की ख्वाहिश रखती हैं। अगर उन्हें 'शिवा ट्रिलॉजी' जैसी किसी पौराणिक फिल्म में काम करने का अवसर मिलता है, तो यह उनके लिए एक सपने के सच होने जैसा होगा।
जब त्रिधा से पूछा गया कि यदि उन्हें किसी बड़े ऐतिहासिक या पौराणिक फिल्म में काम करने का मौका मिले, तो वह किस प्रकार का किरदार निभाना चाहेंगी, उन्होंने कहा कि वह लेखक अमिश त्रिपाठी की प्रसिद्ध किताब 'शिवा ट्रिलॉजी' पर आधारित फिल्म का हिस्सा बनना चाहेंगी।
त्रिधा ने कहा, ''मैंने हाल ही में सुना है कि रणवीर सिंह ने 'शिवा ट्रिलॉजी' के फिल्मी अधिकार खरीद लिए हैं। यह सुनकर मैं बहुत उत्साहित हूं। मैं रणवीर की बहुत बड़ी प्रशंसक हूं और उन्हें एक अभिनेता के रूप में बेहद पसंद करती हूं। उनके हर किरदार में जो ऊर्जा होती है, वह मुझे प्रेरित करती है। उनके साथ काम करना मेरा सपना है।''
उन्होंने आगे कहा, "भगवान शिव के प्रति मेरी गहरी आस्था है, और यही कारण है कि 'शिवा ट्रिलॉजी' से मेरा भावनात्मक जुड़ाव भी है। मैंने इस किताब की पूरी श्रृंखला पढ़ी है और इसकी कहानी ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। यदि मुझे किसी पौराणिक फिल्म में अभिनय करने का मौका मिलता है, तो यह मेरे करियर का सबसे खास अनुभव होगा।"
त्रिधा ने बातचीत में कहा, ''मेरे लिए केवल खूबसूरत दिखना या ग्लैमरस किरदार निभाना महत्वपूर्ण नहीं है। एक कलाकार की असली पहचान उसके अभिनय से होती है। यदि कोई कलाकार स्क्रीन पर अच्छा दिखता है लेकिन अपने किरदार को सही तरीके से नहीं निभा पाता, तो दर्शक उससे जुड़ नहीं पाते।''
अभिनेत्री ने कहा, ''मेरे लिए आलोचकों की प्रशंसा अधिक महत्वपूर्ण होती है। यदि लोग मेरे अभिनय को पसंद करते हैं और महसूस करते हैं कि मैंने किरदार के साथ न्याय किया है, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता है। मैं हमेशा ऐसे रोल चुनना चाहती हूं जिनमें अभिनय करने का अवसर मिले और दर्शकों तक कोई भावना पहुंचाई जा सके।''
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