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कौन थे ओंकार नाथ धार, जिनका खलनायक का किरदार बना हिंदी सिनेमा का हिस्सा?

ओंकार नाथ धार, जिन्हें जीवन के नाम से जाना जाता है, हिंदी सिनेमा के एक प्रसिद्ध खलनायक थे। उनका जीवन संघर्ष और सफलता की कहानी है। कश्मीर में जन्मे जीवन ने 18 साल की उम्र में मुंबई का रुख किया और कई यादगार फिल्मों में 'नारद मुनि' का किरदार निभाया। जानें उनके जीवन के बारे में और कैसे उन्होंने खलनायक की भूमिका में सफलता पाई।
 
कौन थे ओंकार नाथ धार, जिनका खलनायक का किरदार बना हिंदी सिनेमा का हिस्सा?

ओंकार नाथ धार: हिंदी सिनेमा के 'नारद मुनि'


मुंबई, 9 जून। किसी भी फिल्म में नायक या नायिका की भूमिका जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही अहमियत खलनायक की भी होती है। खलनायक का किरदार किसी फिल्म में जान डालने का काम करता है। इसी तरह का एक खलनायक, जो घर से भागकर मुंबई आया, ने दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई। हम बात कर रहे हैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के 'नारद मुनि' ओंकार नाथ धार, जिन्हें आमतौर पर जीवन के नाम से जाना जाता है। उनका निधन 10 जून 1987 को हुआ था।


जीवन का जन्म 1915 में कश्मीर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनेता बनने का सपना था, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही तय किया। जन्म के समय उनकी मां का निधन हो गया और तीन साल की उम्र में उनके पिता ने भी उनका साथ छोड़ दिया। ऐसे परिवार में जन्मे, जहां अभिनय की अनुमति नहीं थी, जीवन ने 18 साल की उम्र में घर छोड़कर मुंबई का रुख किया। उनके पास केवल 26 रुपए थे और करियर की शुरुआत में उन्हें काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा।


जीवन ने एक स्टूडियो में काम करना शुरू किया, जो मोहन लाल सिन्हा का था। जब मोहन लाल को पता चला कि जीवन अभिनय करना चाहते हैं, तो उन्होंने उन्हें अपनी फिल्म 'फैशनेबल इंडिया' में मौका दिया। इसके बाद, जीवन को कई फिल्मों में काम मिला और उन्होंने लगभग 60 फिल्मों में 'नारद मुनि' का किरदार निभाया।


50 के दशक में जीवन ने लगभग हर फिल्म में 'नारद' का किरदार निभाया। 1935 में आई फिल्म 'रोमांटिक इंडिया' से उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी कुछ यादगार फिल्मों में 'अफसाना', 'स्टेशन मास्टर', 'अमर अकबर एंथनी' और 'धर्म-वीर' शामिल हैं। उन्होंने 'नागिन', 'शबनम', 'हीर-रांझा', 'जॉनी मेरा नाम', 'कानून', 'सुरक्षा', और 'लावारिस' जैसी फिल्मों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।


जीवन को जल्दी ही यह एहसास हो गया था कि उनका चेहरा नायक के लिए उपयुक्त नहीं है, इसलिए उन्होंने खलनायक की भूमिकाओं में हाथ आजमाया और इसमें सफलता प्राप्त की।


ओंकार नाथ धार को 'जीवन' नाम विजय भट्ट ने दिया था। उन्होंने पंजाबी फिल्मों में भी काम किया और फोटोग्राफी, नृत्य, एक्शन, और संगीत जैसे क्षेत्रों में भी प्रयास किए, लेकिन उन्हें वहां सफलता नहीं मिली। 71 वर्ष की आयु में, उनका निधन 10 जून 1987 को हुआ।


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