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सुनील दत्त और नरगिस की प्रेम कहानी: क्या सच में 'मदर इंडिया' ने किया था जादू?

सुनील दत्त और नरगिस की प्रेम कहानी एक दिलचस्प सफर है, जो 'मदर इंडिया' के सेट से शुरू हुई। क्या सच में नरगिस ने सुनील के दिल में प्यार की घंटी बजाई? जानें कैसे परिवार की प्राथमिकता ने इस रिश्ते को गहरा किया। सुनील दत्त की फिल्मी और राजनीतिक यात्रा भी इस कहानी का हिस्सा है। पढ़ें पूरी कहानी!
 
सुनील दत्त और नरगिस की प्रेम कहानी: क्या सच में 'मदर इंडिया' ने किया था जादू?

सुनील दत्त का प्यार और परिवार की प्राथमिकता




नई दिल्ली, 24 मई। प्यार और मोहब्बत में सब कुछ स्वीकार्य होता है, खासकर जब वह किसी ऐसे व्यक्ति से हो जो आपके परिवार की चिंता करता हो। हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता सुनील दत्त, जिनकी संवाद अदायगी में एक खास जादू था, जब भी वे स्क्रीन पर आते, दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते। दिलीप कुमार जैसे दिग्गजों के बीच सुनील ने अपनी एक अलग पहचान बनाई।


उनके प्रशंसक आज भी मानते हैं कि 1957 की फिल्म 'मदर इंडिया' के दौरान नरगिस को आग से बचाने के बाद सुनील को उनसे प्यार हुआ, लेकिन सच्चाई कुछ और है।


असल में, 'मदर इंडिया' नहीं, बल्कि 'फैमिली प्रायोरिटी' ने सुनील दत्त के दिल में नरगिस के लिए प्यार की घंटी बजाई। नरगिस ने सुनील की बहन का बिना किसी स्वार्थ के ख्याल रखा और मुश्किल समय में उनका साथ दिया, जिससे सुनील दंग रह गए।


एक इंटरव्यू में सुनील ने कहा था कि अगर आग बुझाने से प्यार होता, तो उन्होंने कई हीरोइनों को बचाया है। मीडिया ने इस बात को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया। असल में, नरगिस की अच्छाई ने उन्हें प्रभावित किया। उन्होंने कहा, 'मैंने तय कर लिया कि मैं नरगिस से शादी के लिए कहूंगा।' जब नरगिस ने हां कहा, तो सुनील की मां भी इस रिश्ते से खुश थीं। इस तरह उनका प्रोफेशनल रिश्ता धीरे-धीरे एक गहरे बंधन में बदल गया।


फिल्म 'मदर इंडिया' में सुनील का गुस्सैल किरदार आज भी दर्शकों को भाता है। उन्होंने न केवल अभिनय में, बल्कि राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। वे पंडित नेहरू से प्रेरित थे और सांसद बने।


सुनील दत्त ने अपने नाम को बदलकर सुनील दत्त रखा था, क्योंकि वे बलराज दत्त के नाम से जाने जाते थे। 1950 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखते समय उन्होंने यह नाम बदला।


उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी खुशी का जिक्र करते हुए कहा कि बंटवारे के बाद जब उन्हें अपनी मां मिली, तो ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया मिल गई हो।


सुनील दत्त का मानना था कि जो कुछ भी उन्हें मिला, वह दर्शकों के प्यार का परिणाम था। उन्होंने कहा कि वे कभी भी फिल्म इंडस्ट्री में आना नहीं चाहते थे।


सुनील ने अपनी फिल्म 'मिलन' के बारे में बताया कि कैसे उन्होंने गोदावरी नदी में कश्ती चलाने की तैयारी की।


उन्होंने 'मदर इंडिया' को एक क्लासिक फिल्म बताया, जो ऑस्कर के लिए नामांकित हुई थी, लेकिन एक वोट से चूक गई।


1962 के युद्ध के दौरान उन्होंने जवानों का मनोरंजन करने के लिए लद्दाख तक का सफर किया।


सुनील दत्त की कहानी केवल फिल्मी सफलता की नहीं, बल्कि बंटवारे के दर्द, सच्चे प्यार, परिवार की प्राथमिकता और देशभक्ति की भी है।


सुनील दत्त ने 'मदर इंडिया', 'वक्त', 'पड़ोसन', 'खानदार', 'सुजाता', 'रेशमा और शेरा', 'हमराज', और 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' जैसी फिल्मों में काम किया। उनकी आखिरी फिल्म 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' थी, जिसमें उन्होंने अपने बेटे संजय दत्त के साथ काम किया।


सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 को हुआ और उनका निधन 25 मई 2005 को हुआ।


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