रूप कुमार राठौड़: एक ऐसी आवाज जो देशभक्ति और प्रेम को जोड़ती है
रूप कुमार राठौड़ का संगीत सफर
मुंबई, 9 जून। हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में कुछ गायकों की आवाजें ऐसी होती हैं, जिन्हें किसी एक शैली में नहीं बांधा जा सकता। रूप कुमार राठौड़ की आवाज भी ऐसी ही है। उन्होंने अपने करियर में ऐसे गाने गाए हैं, जो कभी लोगों की आंखों में आंसू लाते हैं, तो कभी दिल को प्यार से भर देते हैं। उन्होंने देशभक्ति को अपनी आवाज दी है, साथ ही मोहब्बत को भी खूबसूरती से पेश किया है। इस कारण वह उन चुनिंदा गायकों में शामिल हैं, जिन्होंने देशभक्ति और प्रेम दोनों ही प्रकार के गीतों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
रूप कुमार राठौड़ का जन्म 10 जून को मुंबई में हुआ। उनके पिता, पंडित चतुर्भुज राठौड़, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध कलाकार थे। घर में संगीत का माहौल होने के कारण, रूप कुमार का झुकाव भी बचपन से ही संगीत की ओर हो गया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत तबला बजाने से की थी और कई गजल गायकों के साथ तबला बजाते हुए धीरे-धीरे संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
उनका फिल्मी सफर 1990 के दशक में शुरू हुआ। शुरुआती दिनों में उन्होंने कई फिल्मों में गाने गाए, लेकिन असली पहचान उन्हें फिल्म 'बॉर्डर' के गाने 'संदेशे आते हैं' से मिली। इस गाने में उन्होंने सैनिकों की भावनाओं को इतनी सरलता से प्रस्तुत किया कि यह गाना आज भी देशभक्ति के लिए सबसे प्रिय माना जाता है। इसी फिल्म का 'तो चलूं' गाना भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।
रूप कुमार ने कभी अपने आप को एक ही प्रकार के संगीत तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने 'संदेशे आते हैं', 'जिंदगी मौत न बन जाए', 'खुश रहना' और 'कंधों से मिलते हैं कंधे' जैसे गानों के जरिए देशभक्ति की भावना को दर्शाया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने रोमांटिक गानों को भी अपनी आवाज से खास बनाया। 'तुझ में रब दिखता है' उनके करियर का सबसे चर्चित रोमांटिक गाना है, जिसने लाखों दिलों में जगह बनाई।
इसके अलावा, 'मौला मेरे मौला', 'तेरे लिए', 'दिल को तुमसे प्यार हुआ' और 'ओ सैयां' जैसे गाने भी उनकी आवाज को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रहे।
रूप कुमार ने केवल हिंदी में ही नहीं, बल्कि गुजराती, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, असमिया, उड़िया, नेपाली, भोजपुरी और कन्नड़ जैसी कई भाषाओं में गाने गाए हैं। उन्होंने अपने करियर में हजार से अधिक गानों में अपनी आवाज दी है।
गायकी के अलावा, उन्होंने संगीत निर्देशन में भी हाथ आजमाया है। उन्होंने अपनी पत्नी सोनालरी राठौड़ के साथ कई गजल और सूफी शो किए हैं।
उनकी प्रतिभा को कई मंचों पर सराहा गया है। भारतीय संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें 2021 में लोकमत सुर ज्योत्स्ना राष्ट्रीय संगीत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस समारोह में उन्हें विशेष 'आइकन' सम्मान भी प्रदान किया गया।