क्यों बदलनी चाहिए फिल्में? कंगना रनौत ने साझा की अपनी सोच
फिल्मों का बदलता चेहरा
मुंबई, 9 जून। फिल्म उद्योग में निरंतर परिवर्तन हो रहा है। दर्शक ऐसी कहानियों की तलाश में हैं, जिनसे वे खुद को जोड़ सकें और जिनमें उनके जीवन की झलक दिखाई दे। इस विषय पर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि सिनेमा को समाज के साथ-साथ खुद को भी विकसित करना होगा। यदि फिल्में समय की आवश्यकताओं को नहीं समझेंगी, तो दर्शकों के साथ उनका संबंध कमजोर हो सकता है।
इंटरव्यू के दौरान कंगना से पूछा गया कि क्या बड़े सितारों की ऊंची फीस फिल्मों के लिए हानिकारक साबित हो रही है। इस पर उन्होंने उत्तर दिया, ''जब कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं होती, तो उसके खर्चों पर सवाल उठने लगते हैं। लोग यह जानने की कोशिश करते हैं कि पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ। ऐसे समय में कलाकारों की फीस से लेकर फिल्म निर्माण के हर पहलू पर चर्चा होती है।''
उन्होंने आगे कहा, ''अगर किसी परिवार की आय घट जाती है, तो वे अपने खर्चों में कटौती करने की कोशिश करते हैं। लोग सोच-समझकर खर्च करते हैं और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाते हैं। इसी तरह, जब फिल्मों की कमाई कम होती है, तो उद्योग भी अपने खर्चों का पुनर्मूल्यांकन करता है। ऐसे में कलाकारों की फीस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।''
कंगना ने यह भी कहा, ''यह केवल फीस का मुद्दा नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि फिल्में समय के साथ विकसित हों। समाज तेजी से बदल रहा है, लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है और मनोरंजन देखने का तरीका भी बदल चुका है। इसलिए फिल्म उद्योग को नई पीढ़ी और दर्शकों की पसंद को समझना होगा। अगर फिल्में खुद को लगातार प्रासंगिक बनाती रहेंगी, तभी वे दर्शकों को आकर्षित कर पाएंगी।''
उनकी सह-कलाकार स्मिता तांबे ने भी इस विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, ''हर व्यक्ति किसी कहानी में अपने जीवन का एक हिस्सा देखना चाहता है। दर्शक तब अधिक प्रभावित होते हैं, जब उन्हें लगता है कि फिल्म की कहानी या पात्र उनके जैसे लोगों की बात कर रहे हैं। यही जुड़ाव किसी फिल्म को विशेष बनाता है।''
स्मिता ने बताया, ''हमारी आगामी फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' की कहानी आम लोगों से जुड़ी हुई है। इसमें ऐसी महिलाओं, माताओं, नर्सों और कामकाजी लोगों की भावनाओं और संघर्षों को दर्शाया गया है, जिनसे देश का एक बड़ा वर्ग खुद को जोड़ सकता है। जब दर्शक किसी कहानी में खुद को देखते हैं, तभी वे उस फिल्म से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं।''
फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली है।